success story of hero motocorp in hindi

नमस्कार दोस्तों, हम इस आर्टिकल Success Story of Hero Motocorp In Hindi में Hero MotocorpHero Motocorp के Founder Brijmohan Lall Munjal के बारे में विस्तार से जानकारी share करने वाले हैं, इसलिए आप इस आर्टिकल Success Story of Hero Motocorp In Hindi को ध्यानपूर्वक पढ़ें|

Brijmohan Lall Munjal (Founder Of Hero Motocorp)

आइये सबसे पहले हम बात करते हैं, Hero Motocorp के फाउंडर Brijmohan Lall Munjal के बारे में| अविभाजित पंजाब के लालपुर जिले के कमालिया में जन्मे Munjal बंधु हमेशा सब्जी के व्यापार के अपने पारंपरिक व्यवसाय से परे जीवन को देखते थे। बृजमोहन जी का जन्म 1 जुलाई 1923 में कमलिया (kamalia) में हुआ।

उस समय भारत पर अंग्रेजों का शासन था और तब यह पाकिस्तान के पंजाब का हिस्सा था 1920 के दौर में जब लोगों के दिलों में आजादी का सपना अपनी जगह बनाने लगा तब महज 6 साल की उम्र में बृजमोहन जी ने अपने घर के पास में ही खुले नए गुरुकुल में प्रवेश लिया और यहां से शुरुआत हुई उनके साहस और लगन से भरे सफर और इस कहानी की ।

Success Story Of Hero Motocorp In Hindi - Brijmohan Lall Munjal
Brijmohan Lall Munjal : Source – bmu.edu.in

देश की टू-व्हीलर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के पितामह कहलाने वाले Brijmohan Lall Munjal (BM) इतने बिजनेस फ्रेंडली थे कि अपने 1000 से ज्यादा डीलर्स के नाम जबानी याद रखते थे। ये रिश्ता इतना मजबूत रखते थे कि कई बार उन्हें लेने स्टेशन चले जाते थे।

पद्मभूषण से सम्मानित बीएम कहते थे हम तो देश की धड़कन बनना चाहते हैं। और, साइकिल से लेकर टू-व्हीलर तक के सफर में उन्होंने ये कर दिखाया। पाकिस्तान के लायलपुर जिले के एक छोटे से गांव कामलिया के बहादुरचंद मुंजाल के घर जन्में ‘Munjals’ को खेत-खलिहान, घर-मकान और कारोबार छोड़कर भागना पड़ा था।

वहाँ से सब कुछ छोड़कर लुधियाना पहुंचे| चार भाई दयानंद, सत्यानंद, बृजमोहनलाल और ओमप्रकाश मुंजाल ने मिलकर Hero ग्रुप की नींव रखी ।

वे इंडिया आए और अंग्रेजों की ऑर्डिनेंस फैक्टरी में काम करने लगे। अंग्रेजों के लिए काम करना रास नहीं आया तो साइकिल पार्ट्स की ट्रेडिंग का काम शुरू किया। फिर साइकिल खुद ही बनाने लगे।

मुंजाल परिवार पहले साइकिल पार्ट्स बनाता और उनकी ट्रेडिंग करता था। पंजाब आने पर उन्होंने तब के सीएम प्रताप सिंह केरो की सलाह पर पूरी साइकिल बनानी शुरू कर दी। 1956 में पहली हीरो साइकिल मार्केट में आई।

दुनिया में सबसे ज्यादा साइकिलें बनाने का रिकार्ड भी Hero के नाम है। 1986 में गिनीज बुक में उनका नाम दर्ज किया गया था जो आज भी कायम है। Success Story of Hero Motocorp In Hindi

Brijmohan Lall Munjal के बड़े भाई सत्यानंद मुंजाल कहा करते थे कि, हजारों भारतीयों की तरह मुंजाल परिवार की संपन्नता भी साइकिल के कैरियर पर सवार होकर आई।

आइये अब आगे जानते है इस आर्टिकल Success Story Of Hero Motocorp In Hindi में कि कैसे Brijmohan Lall Munjal ने अपने साइकिल के Business को Hero Motocorp में परिवर्तित किया |

Brijmohan Lall Munjal को निम्न सम्मान मिले Success Story of Hero Motocorp In Hindi

बृजमोहन लाल मुंजाल को भारत सरकार द्वारा सन 2005 में उद्योग एवं व्यापार के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इसके अतिरिक्त उन्हें प्राप्त कुछ प्रमुख सम्मान निम्न हैं:

  • Awarded Businessman of the Year in 1994 by business magazine Business India
  • Received the National Award for outstanding contribution to the Development of Indian Small Scale Industry in 1995
  • In 1999 Featured in Most Admired CEO List of the magazine Business Barons
  • Received the Distinguished Entrepreneurship Award from the PHD Chamber of Commerce and Industry in 1997.
  • Xavier Labour Relations Institute (XLRI) conferred Sir Jehangir Ghandy Medal for Industrial Peace in 2000
  • Featured as Ernst & Young Entrepreneur of the year in 2001
  • Received the Lifetime Achievement award for Management from the All India Management Association in 2003
  • Banaras Hindu University, Varanasi conferred him with a doctorate; degree of Doctors of Letters honoris causa in October 2004.
  • Awarded the Padma Bhushan in March 2005 for his contribution to trade and industry in 2005
  • Lifetime Achievement Award by TERI in 2011
  • Lifetime Achievement Award by Ernst & Young in 2011.
  • Lifetime Contribution Award by All India Management Association in 2011
  • Doctor of Science (Honoris Causa) by IIT, Kharagpur in 2011
  • Lifetime Achievement for the Asia Pacific Entrepreneurship in 2011
  • Awards by Enterprise Asia in 2011

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साईकिल के Business से Hero Motocorp बनने तक का सफ़र

बृजमोहन जी भारत की आजादी और भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद 1947 में अपने बिजनेस की शुरुआत की जब वे और उनके भाई लुधियाना आ गए । उन्होंने एक कंपनी सेटअप की जिसका मकसद था गरीबों को बेसिक ट्रांसपोर्ट यानी कि साईकिल उपलब्ध कराना ।

1975 तक यह भारत के सबसे बड़े साइकिल मैन्युफैक्चरर्स बन गए । शुरुआती दिनों में क्योंकि भारत आजाद ही हुआ था , धीरे-धीरे नई-नई कंपनियां बनने लगी , पर उनका काम करने का तरीका organized नहीं था । वे किसी भी डीलर से सामान ले लेते और अपना काम चलाते । पर बृजमोहन जी ने बिजनेस के यह कायदे बदल दिए ।Success Story of Hero Motocorp In Hindi

उन्होंने भरोसेमंद लोगों को अपनी टीम में लिया और यह इसी भरोसे का नतीजा है कि उन लोगों का रिश्ता हीरो मोटोकॉर्प से इतना गहरा हो गया कि आज उस रिश्ते ने हीरो मोटर कॉर्प को बुलंदियों के शिखर पर पहुंचा दिया है । वह कहते हैं ना जल्दी चलना है तो अकेले चलो पर अगर दूर का सफर तय करना है , कामयाबी पानी है तो साथ मिलकर चलो ।

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source : upload.wikimedia.org

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आइये आगे जानते हैं इस आर्टिकल Success Story Of Hero Motocorp In Hindi में Hero Motocorp की कहानी –

साल 1984 में जापान की होंडा मोटर से हाथ मिलाया और बन गई हीरो होंडा मोटर्स लिमिटेड । और उनका पहला प्रोडक्ट हीरो होंडा सीडी हंड्रेड (hero Honda CD 100) थी । यह एक फ्यूल एफिशिएंट बाइक थी जिसे 1985 में लांच किया गया ।

यह हीरो होंडा की पार्टनरशिप का नतीजा था कि केवल 2 साल में उन्होंने लगभग एक लाख मोटरसाइकिल produce की । 1991 में उन्होंने नया मोटरसाइकिल मॉडल ‘स्लीक’ (sleek) लांच किया , जिसकी 500000 बाइक बिक गई व साल 2000 में Hero Honda स्प्लेंडर मोटरसाइकिल लॉन्च की गई , जिसके बाद Hero Honda दुनिया की सबसे बड़ी टू व्हीलर बेचने वाली कंपनी बन गई ।

पर अब आप सोच रहे होंगे कि Hero Honda जब साथ में काम करने पर इतने सफल हुए तो फिर वो जुदा क्यों हुए ? अगस्त साल 2011 में Hero Honda के डायरेक्टर बोर्ड ने  Hero और Honda मोटर्स के विचारों में असमानता होने की वजह से अपने रास्ते अलग करने का फैसला लिया । Success Story of Hero Motocorp In Hindi

यह बात अलग है कि होंडा का हीरो के साथ जो कॉन्ट्रैक्ट था वो 2014 में खत्म होना था , पर हीरो हौंडा ने अपने रास्ते पहले ही अलग कर लिए क्योंकि होंडा ने हीरो को वो टेक्नोलॉजी प्रोवाइड करने से मना कर दिया जो हीरो को अपने प्रोडक्ट और बेहतर बनाने के लिए चाहिए थी । साथ ही हीरो ने ज्वाइंट वेंचर फॉर्म(firm)  के square पार्ट बिजनेस को हीरो मोटरसाइकिल एंड स्कूटर के साथ मिलाने से मना कर दिया ।

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Success Story Of Hero Motocorp In Hindi
Source: autoportal.com

Hero Honda के अलग होने के बाद ही Hero Motocorp को मौका मिला ग्लोबल मार्केट में अपने खुद के नाम हीरो मोटर कॉर्प  के नाम से बढ़ने का ।

इससे पहले हीरो को उन देशों में अपना प्रोडक्ट बेचने की अनुमति नहीं थी जहां पर होंडा अपने प्रोडक्ट बेचता था । पर होंडा से अलग होने के बाद अगस्त साल 2013 के पहले हफ्ते में ही हीरो ने 50 मिलीयन biles प्रड्यूस(produce) की और यह एक ऐसा रिकॉर्ड था जो पहले कभी नहीं बन पाया था ।Success Story of Hero Motocorp In Hindi

इस कंपनी को जन्म देने वाले और इन ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले बृजमोहन लाल मुंजाल जी को पद्म भूषण से नवाजा गया । hero motorcorp को इन बुलंदियों पर पहुंचाने वाले बृजमोहन जी का 1 नवंबर 2015 को 92 साल की उम्र में देहांत हो गया ।

Information About Hero Motocorp

TypePublic
IndustryAutomotive
Founded19 January 1984; 36 years ago
FounderBrijmohan Lall Munjal
HeadquartersNew Delhi, India
Key peoplePawan Munjal (Chairman, MD & CEO)
ProductsMotorcycles, Scooters
Production outputIncrease 7,587,130 units (2018)
RevenueIncrease ₹34,658 crore (US$4.9 billion) (2019)
Operating incomeIncrease ₹5,043 crore (US$710 million) (2019)
Net incomeIncrease ₹3,466 crore (US$490 million) (2019)
Total assetsIncrease ₹17,641 crore (US$2.5 billion) (2019)
Total equityIncrease ₹12,857 crore (US$1.8 billion) (2019)
OwnerMunjal family (39.92%)
Number of employees8,551 (2019)
WebsiteHero Motocorp
Hero MotocorpSuccess Story Of Hero Motocorp In Hindi

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