Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम वर्तमान में चल रहे Armenia and Azerbaijan fight के बारे में हिन्दी में विस्तार से इस आर्टिकल Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi में बात करने वाले हैं|

अर्मेनिया और अजरबैजान में बीच में युद्ध होने से पहले का प्रदर्शन (Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi)

इस साल जुलाई 2020 में युद्ध को लेकर एक देश में भयंकर प्रदर्शन हुए जबकि पूरी दुनिया कोरोना वायरस के ख़ौफ में थी तभी उस दौरान एक देश के हज़ारों कि तादाद में लोग सड़कों पर भीड़ के रूप में जमा हो रहे थे. हालाँकि इस देश में पहले भी कई बार संघर्ष हो चूका है लेकिन इस बार भीड़ ज्यादा उग्र थी|

पिछले सालों में इस देश ने इतने भयानक प्रदर्शन नहीं देखे थे जितने भयानक अबकी बार थे ओर वहाँ की भीड़ भी अबकी बार पहले से ज्यादा उग्र थी और प्रदर्शन भी पहले से कई ज्यादा भयानक|

Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi
Source: dailysabah.com,
Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

प्रदर्शन इतने उग्र थे कि लोग देश की संसद में तक घुस गए और संसद भवन के अंदर शीशे तोड़ डाले थे|इस सबसे भी भीड़ रुकने का नाम नहीं ले रही थी तो मजबूरन police को भीड़ को काबू करने के लिए वाटरकैनन और आंसू गैस वाले गोले का इस्तेमाल करना पड़ा| लेकिन इतनी उग्र भीड़ को रोकने के police के ये प्रयास भी असफल हो रहे थे|

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आखिर इन प्रदर्शनकारियों को क्यों इतना उग्र प्रदर्शन करना पड़ा ?

इस प्रदर्शन का कारण यह है कि वहां कि जनता अपने दुश्मन देश से युद्ध चाहती है| ये लोग वहां की सरकार से मांग कर रहे थे कि जंग शुरू की जाए ओर सेना को जंग (Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh) के लिए भेजा जाए|

अपने पड़ोसी देश(Armenia) पर हमला करने की मांग को लेकर ये प्रदर्शनकारी वहाँ पर भीड़ इक्कठी करके आन्दोलन कर रहे थे और ये प्रदर्शन हो रहा था अज़रबैजान(Azerbaijan) की राजधानी बाकू में|

अर्मेनिया और अजरबैजान कहाँ पर है?

कैस्पियन सागर के तट पर बसा हुआ देश है, अजरबैजानAzerbaijan| जिसके उत्तर दिशा में रूस है, दक्षिण में ईरान तथा पश्चिम में आर्मेनियाArmenia स्थित है, ओर ये जंग भी इन्हीं दो देशों(Armenia and Azerbaijan) के बीच में हो रही है|आर्मेनिया पश्चिम एशिया और यूरोप के काकेशस क्षेत्र में स्थित एक पहाड़ी देश है जो चारों तरफ़ ज़मीन से घिरा है। अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच में पहले भी Nagorno-Karabakh को लेकर जंग हो चुकी है|

Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi
source: wikipedia, Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

पिछली बार का परिणाम जब लड़े थे अज़रबैजान और आर्मेनिया?Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

अब हम इस आर्टिकल(Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi) में बात करेंगे पिछले युद्ध के बारे में| पिछले बार जब अज़रबैजान और आर्मेनिया की आपस में जंग हुई थी तब युद्ध लगभग 2 साल तक चला था ओर इस जंग में दोनों देशों को भरी जानमाल का नुकसान हुआ था|

इस युद्ध के परिणामस्वरूप करीबन 10 लाख लोग बेघर हो गए तथा दोनों ही देशों(Armenia and Azerbaijan) के 30 हजार से अधिक लोग मारे गए थे| पिछले युद्ध के जैसे हालात वापस ना हो इसलिए पूरी दुनिया का हर बड़ा देश यही कह रहा है कि कैसे भी करके इस हिंसा को रोका जाये|इस मामले में रूस ने भी फायरिंग को रोकने के लिए दोनों देशों(Armenia and Azerbaijan) से अपील की है और अमेरिका भी इसी लहजे में करता दिखाई दे रहा है|

अज़रबैजान और आर्मेनिया युद्ध क्यों चाहते हैं और आखिर ये मामला है क्या ?

इस मामले को आसान भाषा में समजे तो लगभग ये मामला भारत-पाकिस्तान और कश्मीर जैसा ही है| आर्मेनिया में ईसाई बहुतायत में है और अज़रबैजान मुस्लिम बहुल देश है| पहले विश्वयुद्ध के दौरान ये पूरा क्षेत्र एक ही देश था तथा ट्रांस-कॉकेशियन फेडरेशन का हिस्सा था| सन 1918 में पहला विश्वयुद्ध खत्म हुआ तब तीन देश बना दिए गए जो आर्मेनियाArmenia, अज़रबैजानAzerbaijan और जॉर्जियाJorjiya बने|

Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi
Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

जहाँ एक तरफ विश्वयुद्ध खत्म होने जा रहा था वहीं उसी समय रूस में बॉल्शेविक क्रांति हो रही थी| 1920 के दशक में ही जोसेफ स्टालिन ने अज़रबैजान और आर्मेनियाArmenia को भी सोवियत संघ में शामिल कर लिया तथा दोनों देशों के बीच में नई सरहद खींच दी गई| बस इसी वजह से झगड़ा शुरू हुआ ओर उस झगड़े के इतने भयानक परिणाम दुनियाँ के सामने आये

इन दोनों देशों (Armenia and Azerbaijan) के बीच एक पहाड़ी इलाका आता है जिसका नाम है, नागोर्नो-काराबाख़(Nagorno-Karabakh)| ओर ये नागोर्नो-काराबाख़ का मामला बिल्कुल भारत-पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे जैसा है, जो कि नागोर्नो-काराबाख़ का क्षेत्र आता तो Azerbaijan है पर वहाँ पर अधिकांश जनसँख्या अर्मेनियाई लोगों की निवास करती है|Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

अर्मेनियाई लोग Azerbaijan में मिलना नहीं चाहते ओर Azerbaijan अपने क्षेत्र Nagorno-Karabakh को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता है|

लगभग 4,400 वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके Nagorno-Karabakh में परंपरागत रूप से ईसाई धर्म मानने वाले आर्मेनियन लोग रहते हैं तथा कुछ संख्या में तुर्की के मुस्लिम भी रहते हैं| साजिशवश जोसेफ स्टालिन ने आर्मेनियाई मूल के लोगों का ये इलाका नगोरनो काराबाख मुस्लिम बहुल देश अज़रबैजान के साथ मिला दिया जिस वजह से ये (Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh) जंग शुरू हुई|

कहाँ पर स्थित है Nagorno-Karabakh ?

नागोर्नो-काराबाख़ दक्षिण कॉकस के इलाक़े में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है। यह कॉकस पर्वत श्रृंखला की हीनकॉकस पहाडियों के अंतर्गत आता है। ज़्यादातर हिस्सा पहाड़ी है और वनों से भी भरा हुआ है। इसका क्षेत्रफल लगभग 4400 वर्ग किमी है। इस क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है तथा औपचारिक रूप से भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अज़रबैजान का ही हिस्सा माना जाता है।

Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi
Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi SOURCE: aljazeera.com

लेकिन यहाँ पर अर्मेनियाई लोगों की बहुतायत है इसलिए आर्मीनिया की मदद से नागोर्नो-काराबाख़ खुद को अज़रबैजान से अलग कर चुका है और किसी स्वतन्त्र देश की भांति अपने मामले खुद ही संभालता है और ये सब हुआ है आर्मीनिया तथा अर्मेनियाई लोगों की बहुतायत के कारण|

खुद को अलग करने के बाद Nagorno-Karabakh ने अपना नाम “नागोर्नो-काराबाख़ गणतंत्र” रख दिया है, ये बात Azerbaijan को रास नहीं आती है। इस Nagorno-Karabakh मतभेद को सुलझाने के लिए Armenia and Azerbaijan के बीच पहले भी कई बार बातचीत हो चुकी है।

स्वायत्त इलाका बनने के बाद क्या हुआ?

Nagorno-Karabakh अज़रबैजान का अब एक स्वायत्त इलाका बन गया जिसमें लगभग 94 फीसदी लोग आर्मेनियाई मूल के थे| स्वायत्त इलाका बनाने के बाद भी झगड़ा चलता रहा पर कभी युद्ध तक नहीं पहुंचा| लेकिन जैसे-जैसे USSR कमज़ोर होता गया वैसे ही आर्मेनिया और अज़रबैजान का झगड़ा धीरे-धीरे बढ़ता गया|Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

जब 1985 के बाद लगभग तय हो गया था कि अब USSR ओर नहीं चल सकेगा तब 1988 में नगोरना काराबाख की विधानसभा ने एक प्रस्ताव पास किया जिसमें ये था कि अब वो आर्मेनिया में मिलना चाहते हैं ओर इस बात से अज़रबैजान को बहुत बड़ा झटका लगा क्योंकि अज़रबैजान ने कभी इसकी कल्पना नहीं कि थी|ओर अब उसे एसा लगने लग गया कि आर्मेनिया ही नगोरना-काराबाख में अलगाववाद भड़का रहा है|Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

दूसरी बात ये भी थी कि नगोरना काराबाख के ईसाई समुदाय के लोग मुस्लिम बहुल देश का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे| परिणामस्वरूप 1991 में सोवियत संघ के विघटित होते ही इस इलाके ने अपने आप खुद को आज़ाद घोषित कर दिया|

जंग हुई, हज़ारों मरे तथा लाखों लोग बेघर हुए

हालांकि दुनिया ने इस इलाके को आज़ाद नहीं माना. और फिर 1992 में युद्ध शुरू हो गया. ये युद्ध 2 साल तक चलता रहा| इस जंग में लगभग 30 हजार से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी थी तथा धार्मिक आधार पर भी लोगों का कत्लेआम हुआ जिस कारण लाखों लोगों ने अपने घर ओर ये क्षेत्र छोड़ दिया| इस भयानक परिणाम के बाद रूस के दखल से दोनों देशों के बीच फिर से सुलह हुई|

Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi
Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

अब जिसके पास जो इलाका है वो उसके पास ही रहेगा इस कारण नगोरना-काराबाख अज़रबैजान से आज़ाद हो गया था, खुद को एक आज़ाद राष्ट्र भी घोषित कर दिया लेकिन किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी| इन सबके बाद भी वहां आर्मेनिया का ही दखल रहा|

हालाँकि उस समय तो मामला शांत हो गया पर अज़रबैजान ने सोच रखा था कि एक दिन दोबारा नगोरना-काराबाख पर हम कब्जा करेंगे क्योंकि आधिकारिक रूप से भी नगोरना-काराबाख अज़रबैजान का ही हिस्सा है|इसके बाद भी आर्मेनिया के समर्थन से नगोरना-काराबाख के जवानों और अज़रबैजान के सैनिकों के बीच फायरिंग व हिंसा होती रहती है जिसके कारण 2016 में हुई हिंसा में लगभग 110 लोग मारे गए थे|Armenia and Azerbaijan fighting over Nagorno-Karabakh In Hindi

अब वापस 2020 में यहाँ जंग फिर से शुरू हो चुकी है जिसे दुनियाँ के बहुत से देश वापस इस जंग पर विराम लगाने कि कोशिश कर रहे हैं|

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